Abstract
पाठशाला भीतर और बाहर के जून अंक (24वाँ) में एफ़एलएन की अवधारणा, कक्षा अनुभव, चुनौतियाँ, आदि को केन्द्र में रखकर लिखे गए कुछ लेख हैं। बातचीत के ज़रिए विद्यार्थियों से जुड़ना और उस बातचीत का शिक्षण प्रक्रिया में उपयोग कैसे हो, बच्चों को रचनात्मक लेखन से कैसे जोड़ें, पाठ योजना बनाकर पढ़ाना कैसे उपयोगी होता है, जैसे लेख भी शामिल हैं। एक ऐसे विद्यालय की कहानी को पढ़ना दिलचस्प होगा जिसका नामांकन एकदम कम हो गया था, लेकिन कुछ ख़ास प्रक्रियाएँ अपनाने से उस विद्यालय में न सिर्फ़ नामांकन बढ़ा, बल्कि विद्यार्थियों के सीखने का स्तर भी बेहतर हुआ।
हमेशा की तरह ईसीसीई पर आलेख है जिसमें आँगनवाड़ी केन्द्र के माहौल और गतिविधियों से जुड़े अनुभव शामिल हैं। नियमित स्तम्भ के अन्तर्गत इस बार ‘इनसे मिलिए’ में मध्य प्रदेश की शिक्षिका से जानेंगे उनके अनुभव, कि कैसे और कौन‑सी प्रक्रियाओं के चलते सीखना बेहतर हुआ। इसके अलावा, इस अंक में ‘शिक्षकों की डायरी से’, ‘किताबों से दोस्ती’, और ‘आइए, करके देखें’ स्तम्भ भी शामिल हैं।
