Abstract
पाठशाला भीतर और बाहर का 22वाँ अंक ‘समावेशी शिक्षा विशेषांक’ है। समावेशन शब्द एकबारगी विशेष दक्षता वाले बच्चों के बारे में ध्वनित होता मालूम होता है। लेकिन इसकी परतों को खोलने पर समझ में आता है कि इसमें विशेष दक्षता वाले बच्चों की बात तो निश्चित तौर पर है ही, साथ ही बात है अलग-अलग सामाजिक‑आर्थिक और सांस्कृतिक परिवेश के विविध मनोभावों वाले वंचित समुदाय के बच्चों की शिक्षा और संसाधनों के बारे में भी। संवैधानिक मूल्यों में रचे बसे स्नेह और सम्मान जैसे मानवीय मूल्य हर बच्चे के लिए ज़रूरी हैं।
इस अंक में आप पढ़ेंगे कि शिक्षक शिक्षा में समावेशन को लेकर किस तरह की योजनाएँ हैं; किस तरह एक विशेष विद्यालय को समावेशी विद्यालय बनाया जा सका; और कलाओं, खेलों, संगीत, आदि के ज़रिए किस तरह समावेशन को दस्तावेज़ों से निकालकर हक़ीक़त में उतारा गया।
आप इस अंक में कुछ स्थाई स्तम्भ भी पढ़ेंगे जिनमें ‘उम्मीद जगाते शिक्षक’ की कहानी है, ‘किताबों से दोस्ती’ में जानेंगे 3 सुन्दर किताबों के बारे में, और ‘आइए, करके देखें’ में समावेशन पर आधारित ऐसी गतिविधियाँ जिन्हें आसानी से कराया जा सकता है। इनके साथ ‘शिक्षकों की डायरी’ स्तम्भ में आप पढ़ेंगे शिक्षकों के काम, उनकी बातें, उनके अनुभव।
