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  • Pathshala Issue 21 Cover low res
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      Abstract

      हमारे समाज में स्त्री-पुरुष, लड़के-लड़कियों के बीच ग़ैर‑बराबरी की सामाजिक‑सांस्कृतिक जड़ें आज भी बहुत गहरी हैं। इनपर कक्षा में बात करना बहुत ज़रूरी है। पाठशाला के इक्कीसवें अंक के एक लेख में इस विषय पर बच्चों से की गई चर्चा के अनुभव प्रस्तुत किए गए हैं। एक अन्य लेख इस बात की पैरवी करता है कि बच्चे डर के माहौल से नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव से बेहतर सीखते हैं। इसके लिए शिक्षकों में बच्चों के प्रति सहानुभूति व समानुभूति का बोध होना चाहिए। सुबह की सभा, यानी मॉर्निंग असेंबली का शिक्षकों और बच्चों के लिए क्या महत्त्व है; और इसे ज़्यादा रचनात्मक, शैक्षिक और भागीदारीपूर्ण कैसे बनाया जा सकता है?  एक लेख में इस बारे में चर्चा की गई है। इबारती सवालों पर काम के अनुभव पर आधारित एक लेख में बताया गया है कि जब तक गणित में भाषा का ज़्यादा-से-ज़्यादा इस्तेमाल न किया जाए, बच्चों को गणित समझने में दिक़्क़त आती है। गणित के दूसरे लेख में मापन की अवधारणा, उसकी इकाइयों एवं पैमाने से लम्बाई मापने के अनुभव साझा किए गए हैं।

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