पाठशाला भीतर और बाहर |अंक‑28
Azim Premji University,
Abstract
पाठशाला भीतर और बाहर का जून अंक विद्यालय संस्कृति, डर किस तरह सीखना बाधित करता है और साथ मिलकर सीखना कैसे सीखने के आनंद को बढ़ा देता है जैसे मुद्दों पर केन्द्रित है। इसके अलावा बाल साहित्य या पढ़ने की घण्टी को भाषा की गतिविधि तक सीमित न रखकर उसका जुड़ाव तमाम विषयों को समझने और विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में कैसे देखा जा सकता है, पहली और दूसरी भाषा सीखने से जुड़ी मुश्किलों और उनसे निकलने के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई इस बारे में भी लेख इस अंक में शामिल है। इसके अतिरिक्त हमेशा की तरह सभी स्थाई स्तम्भ भी अंक का हिस्सा हैं, जिनमें विभिन्न राज्यों से आई शिक्षक डायरी, ‘किताबों से दोस्ती’ में कुछ ज़रूरी किताबों की बात, ‘उम्मीद जगाते शिक्षक’ के अन्तर्गत पढ़ेंगे ऐसे शिक्षक की कहानी जिन्होंने पढ़ने-लिखने की गतिविधियों को कुछ इस तरह विद्यालय में किया कि विद्यार्थियों का पढ़ना-लिखना बेहतर हुआ। साथ ही हैं कुछ रोचक और उपयोगी गतिविधियाँ।
