Publications & Resources

Our faculty, students and researchers work together everyday to contribute to a better world by grappling with urgent problems we are facing in India. We conduct rigorous work to produce high quality learning resources and publications to contribute to public discourse and social change. Here, we feature a sample from our work for everyone to access. You can explore featured resources, policies, and the latest publications from the University.

To explore all the work of our University, please visit our publications repository.

  • Pathshala Issue 22 Cover
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      Abstract

      पाठशाला भीतर और बाहर का 22वाँ अंक समावेशी शिक्षा विशेषांक’ है। समावेशन शब्द एकबारगी विशेष दक्षता वाले बच्चों के बारे में ध्वनित होता मालूम होता है। लेकिन इसकी परतों को खोलने पर समझ में आता है कि इसमें विशेष दक्षता वाले बच्चों की बात तो निश्चित तौर पर है ही, साथ ही बात है अलग-अलग सामाजिक‑आर्थिक और सांस्कृतिक परिवेश के विविध मनोभावों वाले वंचित समुदाय के बच्चों की शिक्षा और संसाधनों के बारे में भी। संवैधानिक मूल्यों में रचे बसे स्नेह और सम्मान जैसे मानवीय मूल्य हर बच्चे के लिए ज़रूरी हैं। 

      इस अंक में आप पढ़ेंगे कि शिक्षक शिक्षा में समावेशन को लेकर किस तरह की योजनाएँ हैं; किस तरह एक विशेष विद्यालय को समावेशी विद्यालय बनाया जा सका; और कलाओं, खेलों, संगीत, आदि के ज़रिए किस तरह समावेशन को दस्तावेज़ों से निकालकर हक़ीक़त में उतारा गया। 

      आप इस अंक में कुछ स्थाई स्तम्भ भी पढ़ेंगे जिनमें उम्मीद जगाते शिक्षक’ की कहानी है, किताबों से दोस्ती’ में जानेंगे 3 सुन्दर किताबों के बारे में, और आइए, करके देखें’ में समावेशन पर आधारित ऐसी गतिविधियाँ जिन्हें आसानी से कराया जा सकता है। इनके साथ शिक्षकों की डायरी’ स्तम्भ में आप पढ़ेंगे शिक्षकों के काम,  उनकी बातें,  उनके अनुभव।

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    • Pathshala Issue 21 Cover low res
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        Abstract

        हमारे समाज में स्त्री-पुरुष, लड़के-लड़कियों के बीच ग़ैर‑बराबरी की सामाजिक‑सांस्कृतिक जड़ें आज भी बहुत गहरी हैं। इनपर कक्षा में बात करना बहुत ज़रूरी है। पाठशाला के इक्कीसवें अंक के एक लेख में इस विषय पर बच्चों से की गई चर्चा के अनुभव प्रस्तुत किए गए हैं। एक अन्य लेख इस बात की पैरवी करता है कि बच्चे डर के माहौल से नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव से बेहतर सीखते हैं। इसके लिए शिक्षकों में बच्चों के प्रति सहानुभूति व समानुभूति का बोध होना चाहिए। सुबह की सभा, यानी मॉर्निंग असेंबली का शिक्षकों और बच्चों के लिए क्या महत्त्व है; और इसे ज़्यादा रचनात्मक, शैक्षिक और भागीदारीपूर्ण कैसे बनाया जा सकता है?  एक लेख में इस बारे में चर्चा की गई है। इबारती सवालों पर काम के अनुभव पर आधारित एक लेख में बताया गया है कि जब तक गणित में भाषा का ज़्यादा-से-ज़्यादा इस्तेमाल न किया जाए, बच्चों को गणित समझने में दिक़्क़त आती है। गणित के दूसरे लेख में मापन की अवधारणा, उसकी इकाइयों एवं पैमाने से लम्बाई मापने के अनुभव साझा किए गए हैं।

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      • LC Issue 19 Cover Page
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          Abstract

          This issue focuses on practices that build a school culture – practices that become so ingrained in the school’s ethos that they come naturally to everyone and do not change if those who helped develop these move out of the school. It includes several aspects of the school culture, such as creating an environment where all students feel safe, valued, and seen; where there is no fear of any subject, where there is a high level of collaboration among teachers and continuous engagement with parents.

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        • Pathshala Issue 20 Cover
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            Abstract

            हमारे आज के विविधतापूर्ण और बहुरंगी समाज के लिए हिंसा और शोषण की संस्कृति ठीक नहीं है। आज के दौर के लिए संवाद की संस्कृति ही ज़्यादा ठीक है। इस विचार पर पाठशाला भीतर और बाहर के बीसवें अंक के एक लेख का मुख्य विषय के रूप में विस्तार से बात की गई है। इस अंक के कुछ लेखों में पाठ्यपुस्तक और पाठ्येतर कहानी-कविताओं के शिक्षण की सुविचारित योजना बनाकर भाषाई कौशलों के विकास और इनके आकलन पर किए गए कार्य के अनुभव प्रस्तुत किए गए हैं। जिसमें एक लेख डायरी लेखन और दूसरा लेख रीडिंग कॉर्नर के ज़रिए बच्चों को लेखन सिखाने के तरीकों के बारे में है। गणित का एक लेख बच्चों को शुरुआत से ही इबारती सवालों पर काम करने, खुद सवाल बनाने और जाँचने को गणितीयकरण की प्रक्रिया के तौर पर देखता है। दूसरा गणितीय सोच व तार्किक क्षमता के विकास के लिए तरीके सुझाता है। इस बार के संवाद का विषय विज्ञान, वैज्ञानिक सोच और पाठ्यपुस्तकें है।

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          • Learning Curve Issue 18 Cover page
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              The National Curriculum Framework for Foundation Stage (NCF-FS) document has not reached all teachers and is yet to be translated into regional languages. But as we wait for this, we thought we could start to understand it and the experience of some teachers in Azim Premji Schools and those who we work with in government schools in several states who have been implementing parts of it in their classrooms.

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            • Pathshala Issue 19 Cover page
              Published
              Authors

                Abstract

                पाठशाला भीतर और बाहर  के उन्नीसवें अंक के ज़्यादातर लेख पुस्तकालय और भाषा की पढ़ाई के विविध पहलुओं पर केन्द्रित हैं। इन लेखों में, अच्छी किताबों से ही अच्छे स्कूल पुस्तकालय की कल्पना साकार होती है व पुस्तकालय को जीवन्त और सक्रिय कैसे बनाया जाए, जैसे विषयों को उठाया गया है। एक लेख लोकतंत्र में संवाद की संस्कृति बनाने व इसके महत्त्व के बारे में है। साक्षात्कार में चिन्तनशील शिक्षक और इनकी रचनात्मकता के विकास की प्रक्रिया पर चर्चा की गई है। संवाद में, संवैधानिक मूल्य बन्धुता के भाव को विकसित करने के लिए स्कूली स्तर पर किए जाने वाले प्रयासों के बारे में अनुभवपरक विचार रखे गए हैं।

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