पाठशाला भीतर और बाहर |अंक‑20

Azim Premji University,

Abstract

हमारे आज के विविधतापूर्ण और बहुरंगी समाज के लिए हिंसा और शोषण की संस्कृति ठीक नहीं है। आज के दौर के लिए संवाद की संस्कृति ही ज़्यादा ठीक है। इस विचार पर पाठशाला भीतर और बाहर के बीसवें अंक के एक लेख का मुख्य विषय के रूप में विस्तार से बात की गई है। इस अंक के कुछ लेखों में पाठ्यपुस्तक और पाठ्येतर कहानी-कविताओं के शिक्षण की सुविचारित योजना बनाकर भाषाई कौशलों के विकास और इनके आकलन पर किए गए कार्य के अनुभव प्रस्तुत किए गए हैं। जिसमें एक लेख डायरी लेखन और दूसरा लेख रीडिंग कॉर्नर के ज़रिए बच्चों को लेखन सिखाने के तरीकों के बारे में है। गणित का एक लेख बच्चों को शुरुआत से ही इबारती सवालों पर काम करने, खुद सवाल बनाने और जाँचने को गणितीयकरण की प्रक्रिया के तौर पर देखता है। दूसरा गणितीय सोच व तार्किक क्षमता के विकास के लिए तरीके सुझाता है। इस बार के संवाद का विषय विज्ञान, वैज्ञानिक सोच और पाठ्यपुस्तकें है।