‘जोड़‑घटाना : स्कूल के गणित का ज़िन्दगी के गणित से अलगाव’ और ‘गणित तर्क की क्षमता कैसे बढ़ाता है?’
पाठशाला भीतर और बाहर पत्रिका के अंक 20 में प्रकाशित लेखों के लेखक मीनू पालीवाल और मुकेश मालवीय के साथ चर्चा

गणित शिक्षण के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए कक्षा में कैसे काम किया जाए; गणितीय तर्क व सोच की समझ क्या है, और यह कैसे विकसित होती है; बच्चों की गणित की पढ़ाई में इबारती सवालों की क्या अहमियत है, और इनपर कैसे कार्य करें; स्कूल के गणित में बच्चों के आम जीवन के गणित की क्या अहमियत है; जैसे गणितीय सवालों से जूझने, और मन में नए सवालों को उपजाने के लिए पाठशाला के वेबिनार में शामिल हों।
चर्चा करेंगे : मोहम्मद उमर
चर्चा हिन्दी में होगी।
लेख यहाँ पढ़ें: https://bit.ly/4eaXbph और https://bit.ly/3XewcT5
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वक्ताओं के बारे में
मीनू पालीवाल
मीनू पालीवाल ने अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन में 6 वर्ष सन्दर्भ व्यक्ति के तौर पर कार्य किया है। आप फ़ेलोशिप प्रोग्राम के ज़रिए अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन से जुड़ीं। इसके पहले उन्होंने 6 वर्ष आईसीआईसीआई बैंक में काम किया है। आप अपने मन में आने वाले सवालों की तलाश में शिक्षा और शिक्षण प्रक्रिया से जुड़ीं। आप शोधपरक अनुभव पत्र‑पत्रिकाओं में लिखती रहती हैं। आपको प्राथमिक कक्षाओं में काम करना अच्छा लगता है।
मुकेश मालवीय
मुकेश मालवीय पिछले दो दशक से भी ज़्यादा समय से स्रोत शिक्षक के रूप में सरकारी और ग़ैर‑सरकारी भूमिकाओं में सक्रिय हैं। अपने कक्षा अनुभवों को निरन्तर पत्र‑पत्रिकाओं में लिखते रहते हैं। वर्तमान में अनुसूचित जाति विकास विभाग के शासकीय आवासीय ज्ञानोदय विद्यालय, होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। आप एनसीईआरटी की प्रिपरेटरी स्टेज की कक्षा 3, 4 और 5 की गणित की पाठ्यपुस्तकों के लेखन में शामिल रहे हैं।
मोहम्मद उमर
मोहम्मद उमर विगत ढाई दशकों से विज्ञान और गणित शिक्षण, लेखन एवं शिक्षक प्रशिक्षण के कार्य से जुड़े हैं। आपने शुरुआती 7 साल एक प्रयोगधर्मी परियोजना में गणित और विज्ञान के शिक्षक के तौर पर अध्यापन किया है। पाँच साल तक एकलव्य संस्था के साथ जुड़कर शिक्षक शिक्षा और सामग्री निर्माण में काम किया है। आप पिछले 14 वर्षों से अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन, राजस्थान में गणित विषय के सन्दर्भ सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। आप विगत 3 सालों से अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय बेंगलूरु के फ़ैकल्टी के रूप में शिक्षा में स्नातकोत्तर करने वाले विद्यार्थियों को ‘शिक्षक का पेशेवर विकास’ व ‘गणित विषय में पाठ्यचर्या विकास और सामग्री निर्माण’ का कोर्स पढ़ा रहे हैं। आप विभिन्न शैक्षणिक पत्रिकाओं में नियमित रूप से लिखते हैं।
